बरेली में ५८ वें उर्षे शाह शराफत की कुल शरीफ की फातेहा जोश ओ खरोश के साथ हुई मुकम्मल।
बरेली में ५८ वें उर्षे शाह शराफत की कुल शरीफ की फातेहा जोश ओ खरोश के साथ हुई मुकम्मल।

संवाददाता शोएब म्यानुंर बरेली
उत्तर प्रदेश : बरेली शरीफ में सिलसिला ए नक्शबंदी के अज़ीमो तरीन सख्सियात पीरो मुर्शीद हज़रत शाह शराफत अली मियां का ५८ वें उर्ष के मौके पर कुल शरीफ की फातेहा पढ़ाई और जोश ओ खरोश के साथ मुकम्मल हुई।
हजरत पीरो मुर्शिद शाह गाज़ी मिंया हुजुर ने कुल शरीफ की फातेहा पढ़ाई।
उर्षे शाह शराफत मिंया १,२,३ और ४ सेप्टेंबर व रबीउल अव्वल की ८,९,१० और ११ को मनाया गया,
उर्ष के आखरी दिन हजरत पीरो मुर्शिद शाह गाज़ी मिंया हुजुर ने कुल शरीफ की फातेहा पढ़ाई, कुल शरीफ की फातेहा में लाखों मुरिदैन फातेहा में मौजूद रहे, जिसमें बरैली के अलावा, देश विदेश से मुंबई, सुरत, मालेगांव, झांसी, जेतपुर, दील्ली, मुरादाबाद, हैदराबाद, कोलकता, पंजाब, और पुरे हिन्दुस्तान, आफ्रिका, होंगकोंग, से सकलैनी उपस्थित रहे,
उर्ष के दौरान रोजाना महेफीले नाअत, मुशायरा, और औलमाओं के बयान का प्रोग्राम कीया जाता है, नात ख्वां हाफीज आमील सक़लैनी और रौनक सक़लैनी ने अपने अंदाज में नाअत शरीफ पैस किए,
उर्ष में रोजाना लाखों मुरिदैन के लिए आस्ताना ए शाह शराफत मिंया में रहने और खाने का ईंतेजाम भी किया जाता है, वैसे तो यहां रोजाना 365 दीन दो टाईम लंगर खाना बनाया जाता है और कई लोग रोजाना यहां खाना खाते हैं इसके अलावा यहां के परीन्दे और आसपास के जानवर को भी खाना मील जाता है,
यहां दरगाह में कीसी के पास एक रुपया भी नहीं लिया जाता,
दरगाह के खादीम हज़रात और बरैली के सभी सदस्य यहां बहार गांव से आने वाले लोगों के लिए सारे ईन्तजामात में एक महीने पहले से लग जाते हैं और उर्ष के बाद १० दीन तक कामों में लगे रहते हैं,
कुल शरीफ की फातेहा के बाद बहार गांव के महेमान जो वापसी के लीए जाने वाले होते हैं उन्हें हज़रत पीरो मुर्शिद शाह गाज़ी मियां हुजुर ने उनके लिए दुआ फरमाए और रास्ते के लिए खाना भी दिए,
उर्ष के दौरान बरैली में जगेह जगेह से दरगाह शरीफ पर चादर चदाने का जुलूस नीकाला जाता है, और कोमी एकता भी देखने को मिलती है, कोई दुर्घटना ना हो इसलिए शासन, प्रशासन की और से सुरक्षा कर्मी और पुलिस फौज भी तैनात कि जाती है,
उर्ष में बरैली का शाह बाज मोहल्ला रोशनी से जगमगा उठता है, पुरे मोहल्ले को लाईटींग से दुल्हन की तरहां सजाया जाता है, और पुरा बरैली शहर, उर्षे शाह शराफत जींन्दाबाद, के नारों से गूंज उठता है बरैली,
आपको बता दें की हज़रत शाह सक़लैन एकेडमी ऑफ इंन्डिया की बरैली के अलावा पुरे हिन्दुस्तान में बहोत सी शाखाएं हैं और सभी जगेह, शमुह शादी, स्कुल फीस, जरुरत मंद को अनाज बांटना, कपड़े बांटना, और बहोत से काम हज़रत शाह सक़लैन एकेडमी ऑफ इंडिया की जानिब से किए जाते हैं,
ईस मौके पर मुंबई से हज़रत शाह सक़लैन एकेडमी ऑफ इंन्डिया के औल ईन्डिया सदर डोकटर ईस्माईल कुरैशी भी उपस्थित रहे और बरैली के मीडिया प्रभारी जनाब सय्यद मोहशीन आलम, जनाब हमजा मींया, भी उपस्थित रहे,
हज़रत शाह सक़लैन एकेडमी ऑफ इंन्डिया बरैली के सभी सदस्यों ने ईस उर्षे मुबारक को कामयाब बनाया और पाए तकमील पहुंचाया।
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