मुंबई | प्रतिनिधि
"इन्ना लिल्लाहि वा इन्ना इलैहि राजिऊन"
(बेशक हम अल्लाह ही के हैं और उसी की तरफ़ लौटकर जाने वाले हैं।)
इस्लामी दुनिया के मुमताज़ आलिम-ए-दीन, मशहूर मुफक्किर, मोअर्रिख़, मुहक़्क़िक़, मुफस्सिर और उम्मत-ए-मुस्लिमा की बुलंद आवाज़ हज़रत मौलाना सैयद सलमान हुसैनी नदवी के इंतिक़ाल की ख़बर से पूरे मुल्क समेत आलमी इस्लामी हल्क़ों में गहरा रंज़-ओ-ग़म फैल गया है।
सरहदी गांधी मेमोरियल सोसायटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट सैयद जलालुद्दीन ने अपने ताज़ियती पैग़ाम में कहा कि हज़रत मौलाना का इंतिक़ाल सिर्फ़ उम्मत-ए-मुस्लिमा ही नहीं, बल्कि पूरे मुल्क के इल्मी, तालीमी, फ़िक्री और समाजी हल्क़ों के लिए एक नाक़ाबिल-ए-तलाफ़ी नुक़सान है।
उन्होंने कहा कि मरहूम मौलाना ने अपनी पूरी ज़िंदगी दीन-ए-इस्लाम की सही तफ़हीम, इल्मी व तहक़ीक़ी ख़िदमात, इस्लाही तहरीकों, कौमी यकजहती, मज़हबी हमआहंगी, इंसानी भाईचारे और अमन-ओ-मोहब्बत के फ़रोग़ के लिए वक़्फ़ कर दी। उनके ख़ुत्बात, तहरीरें, तस्नीफ़ात और फ़िक्री रहनुमाई ने लाखों लोगों को दीन और ज़िंदगी के सही रास्ते की तरफ़ रहनुमाई की।
एडवोकेट सैयद जलालुद्दीन ने कहा कि मरहूम मौलाना हमेशा सब्र, बर्दाश्त, इंसाफ़, मोहब्बत और बाहमी एहतराम का पैग़ाम देते रहे। उन्होंने इख़्तिलाफ़-ए-राय के बावजूद मुक़ालमे, अमन और भाईचारे की रवायत को मज़बूत किया। उनकी इल्मी और दीनी ख़िदमात हमेशा तारीख़ के सुनहरे सफ़्हों में महफ़ूज़ रहेंगी और आने वाली नस्लों के लिए मशअल-ए-राह साबित होंगी।
उन्होंने मरहूम के अहल-ए-ख़ाना, मुतअल्लिक़ीन, तलबा, चाहने वालों और तमाम उम्मत-ए-मुस्लिमा से दिली ताज़ियत और हमदर्दी का इज़हार करते हुए दुआ की:
"अल्लाह तआला मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी तमाम लग़ज़िशों को माफ़ फ़रमाए, उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमाए, उनके दर्जात बुलंद फ़रमाए और उनके पसमांदगान को सब्र-ए-जमील और अज्र-ए-अज़ीम अता फ़रमाए। आमीन।"
उन्होंने यह भी दुआ की कि अल्लाह तआला उम्मत-ए-मुस्लिमा को मरहूम मौलाना की इल्मी, फ़िक्री और दीनी विरासत को आगे बढ़ाने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए।

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