MSEDCL की घोर लापरवाही का शिकार: तीन साल का मासूम नुहान शेख करंट लगने से गंभीर, इलाके में उबाल
मुन्ना मुजावर
हडपसर
पुणे के हडपसर स्थित भारत कॉलोनी, हांडेवाड़ी रोड इलाके में सोमवार शाम घटी दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे क्षेत्र को हिलाकर रख दिया है। महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (MSEDCL) की बार-बार की लापरवाही और उदासीनता का खामियाजा इस बार मात्र तीन साल के नन्हे नुहान शेख को भुगतना पड़ा। खुला पड़ा बस बार और लटकती खतरनाक तारों के जाल में फंसकर बच्चे को 11 KV का तेज़ करंट लगा, जिससे उसकी हालत बेहद नाजुक बनी हुई है।
घटना शाम करीब 6 बजे की है। खेलते-कूदते नुहान अचानक बस बार के पास पहुंच गया। चंद सेकंड में ही करंट का जोरदार झटका लगा और बच्चा जमीन पर गिर पड़ा। चीख-पुकार मच गई। पड़ोसियों ने तुरंत उसे गोद में उठाया और ऑटो से ससून जनरल अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों की टीम ने बताया कि बच्चे के शरीर के 40% से ज्यादा हिस्से पर गंभीर जलन के निशान हैं। फिलहाल वह वेंटिलेटर पर है और अगले 48 घंटे बेहद निर्णायक हैं।
MSEDCL की पुरानी लापरवाही का लंबा इतिहास
स्थानीय निवासी मोईज मोमिन , ने गुस्से में बताया,
“पिछले दो साल से हम लोग MSEDCL के हडपसर सब-डिविजन ऑफिस में दर्जनों शिकायतें दर्ज करा चुके हैं। खुले बस बार, सड़क पर लटकती हाई-वोल्टेज तारें, टूटे हुए पोल और बारिश में चिंगारी निकलते ट्रांसफॉर्मर – हर चीज की फोटो और वीडियो भेजी, लेकिन जवाब मिलता था – ‘तकनीकी टीम जल्द आएगी’। आज तक कोई नहीं आया।”
एक अन्य निवासी दावहरे काका ने कहा,
“यहां बच्चे रोज स्कूल जाते वक्त इन तारों के नीचे से गुजरते हैं। पिछले साल एक कुत्ता करंट लगने से मर गया था, तब भी कोई सबक नहीं लिया गया। MSEDCL के इंजीनियर तो बिल वसूलने आते हैं, लेकिन सुरक्षा के नाम पर जीरो काम।”
लिखित शिकायतों का ढेर, कार्रवाई शून्य
कांग्रेस कार्यकर्ता अक्षय बहिरट ने खुलासा किया कि भारत कॉलोनी के नाम पर MSEDCL के पास बहुत बार शिकायतें दर्ज की है हर बार जवाब एक ही: “मामला प्राथमिकता पर है”। लेकिन हकीकत यह है कि इलाके में पिछले 6 महीने से एक भी मेंटेनेंस टीम नहीं आई।
जनता का फूटा गुस्सा,
घटना के तुरंत बाद लोग घुस्से में नजर आए । स्थानिक लोगों का कहना था “MSEDCL ”, “लापरवाही बंद करो”, “मासूम की जान बचाओ” । लोगों ने चेतावनी दी कि अगर 24 घंटे में बस बार कवर नहीं किया गया और पूरी लाइन की जांच नहीं हुई, तो बड़ा आंदोलन होगा।
MSEDCL का बचाव, पर कोई ठोस जवाब नहीं
बड़ा सवाल: कब तक चलेगी ये खूनी बेपरवाही?
आज नुहान शेख जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है। लेकिन सवाल यह है –
क्या MSEDCL को इंसानी जान की कीमत समझ आएगी?
कितने और मासूमों की बलि चढ़ने के बाद ये “जल्द कार्रवाई” का ढोंग बंद होगा?
क्या सरकारी कंपनी होने के नाते जवाबदेही से भाग सकती है MSEDCL?
इलाके के लोग अब एकजुट होकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करने की तैयारी कर रहे हैं। साथ ही, नुहान के इलाज के लिए क्राउडफंडिंग भी शुरू हो गई है।
MSEDCL की इस लापरवाही ने एक बार फिर साबित कर दिया –
बिजली का बिल वसूलना आसान है, लेकिन जान बचाना मुश्किल।
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