मुंबई: दक्षिण मुंबई के मशहूर रेस्टोरेंट 'पूर्णिमा रेस्टोरेंट' ने बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। इसमें FSSAI (भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण) लाइसेंस सस्पेंड करने और महाराष्ट्र FDA (खाद्य और औषधि प्रशासन) द्वारा जारी 'काम बंद करने' के नोटिस को चुनौती दी गई है। रेस्टोरेंट का आरोप है कि यह कार्रवाई मनमानी और गैर-कानूनी थी और इसे तय प्रक्रिया का पालन किए बिना किया गया।
इसके मालिक प्रमोद नायक के ज़रिए दायर इस रिट याचिका में 23 जुलाई को FDA अधिकारियों के अचानक निरीक्षण के बाद जारी नोटिस को रद्द करने की मांग की गई है।
रेस्टोरेंट ने सस्पेंशन और बंदी के आदेशों पर अंतरिम रोक लगाने की भी मांग की है। उनका कहना है कि जब तक कोर्ट इस मामले पर कोई फैसला नहीं ले लेता, तब तक उन्हें अपना कामकाज फिर से शुरू करने की इजाज़त मिलनी चाहिए। अपनी याचिका में, फोर्ट इलाके के मशहूर उडुपी रेस्टोरेंट ने FDA पर प्रक्रिया में गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगाए हैं। रेस्टोरेंट का दावा है कि अधिकारियों ने मनमानी की, रिकॉर्ड में हेरफेर किया और लाइसेंस सस्पेंड करने से पहले 'फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट' के तहत तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया।
FDA की इंस्पेक्शन रिपोर्ट में कई कथित उल्लंघनों का ज़िक्र था, जैसे कि साफ़-सफ़ाई न होना, किचन का फ़र्श गीला होना, रेफ्रिजरेटर का दरवाज़ा ख़राब होना, FSSAI लाइसेंस का सही ढंग से न लगा होना और कीड़ों को रोकने के लिए ज़रूरी इंतज़ाम न होना।
हालांकि, रेस्टोरेंट ने इन आरोपों से इनकार किया है। उसने हाई कोर्ट में तस्वीरें पेश करके दिखाया कि रेफ्रिजरेटर का दरवाज़ा ठीक से काम कर रहा था और कीड़ों को रोकने के लिए खिड़कियों पर जाली लगी हुई थी। मैनेजमेंट ने यह भी कहा कि किचन का फ़र्श इसलिए गीला था क्योंकि इंस्पेक्शन के समय रोज़ाना की सफ़ाई चल रही थी।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि फ़ूड सेफ्टी अधिकारियों ने रेड पूरी होने के बाद ही इंस्पेक्शन से जुड़े ईमेल भेजे, ताकि ऐसा रिकॉर्ड बनाया जा सके जिससे लगे कि सही प्रक्रिया का पालन किया गया था। यह भी दावा किया गया कि FDA ने एक दूसरी लाइसेंस्ड जगह को भी बंद करने का आदेश दिया, जबकि वहां कोई इंस्पेक्शन नहीं हुआ था।
याचिका में कहा गया, "यह कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों की पूरी तरह अनदेखी करके की गई है।"
रेस्टोरेंट के मुताबिक, FDA ने लाइसेंस सस्पेंड करने से पहले ज़रूरी 'सुधार नोटिस' (improvement notice) जारी नहीं किया, जबकि ऐसी कमियों के मामलों में सख़्त कार्रवाई से पहले ऐसा करना ज़रूरी होता है जिन्हें सुधारा जा सकता है।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि अधिकारी फ़ूड से जुड़ी जगहों पर लगातार रेड कर रहे हैं, तुरंत सोशल मीडिया पर तस्वीरें और वीडियो शेयर कर रहे हैं और किसी भी फ़ैसले या जांच के पूरा होने से पहले ही कारोबार की साख को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
सस्पेंशन को मनमाना और ज़रूरत से ज़्यादा सख़्त बताते हुए, रेस्टोरेंट ने हाई कोर्ट से सस्पेंशन और कारोबार रोकने के नोटिस पर रोक लगाने की अपील की है। उनका कहना है कि इस कार्रवाई से उनके कारोबार और रोज़ी-रोटी पर बुरा असर पड़ा है। उम्मीद है कि इस याचिका पर बॉम्बे हाई कोर्ट में सुनवाई होगी।

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