वर्सोवा के एक ही घर में हिंदू-मुस्लिम वोटर्स!३५० वोटर्स का अता-पता नहीं बंगाली में भी दर्ज हैं कई मतदाताओं के नाम
वर्सोवा के एक ही घर में हिंदू-मुस्लिम वोटर्स!३५० वोटर्स का अता-पता नहीं बंगाली में भी दर्ज हैं कई मतदाताओं के नाम

मुंबई…वर्सोवा विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची में एक बड़ा घोटाला उजागर हुआ है। वहां एक ही घर में हिंदू-मुस्लिम वोटर्स मिले हैं। मनसे द्वारा किए गए सत्यापन में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। ऐसे में कहा जा रहा है कि भाजपा है तो कुछ भी मुमकिन है।
जांच के दौरान पता चला है कि कम से कम ३५० मतदाता ऐसे हैं, जिनका कोई अता-पता नहीं है। मतदाता सूची में उनके नाम के सामने पता दर्ज नहीं होने से इन मतदाताओं का अस्तित्व ही संदिग्ध माना जा रहा है। जहां तक एक ही घर में हिंदू-मुस्लिम वोटर्स का सवाल है तो जांच में सामने आया है कि सूची क्रमांक २६८ में एक ही घर के पते पर हिंदू-मुस्लिम के साथ ही अन्य धर्मों के मतदाताओं के नाम एक साथ दर्ज पाए गए हैं। यह व्यवस्थित रूप से मतदाता सूची में हेराफेरी का स्पष्ट संकेत है।
गंभीर विसंगतियां
हैरानी की बात है कि वोटर लिस्ट में कुछ वोटर्स के नाम बंगाली में दर्ज हैं। इस के साथ ही मनसे कार्यकर्ताओं द्वारा की गई जांच में कई और गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं। इन गंभीर विसंगतियों के मद्देनजर राज्य निर्वाचन आयोग के समक्ष लिखित शिकायत की गई है।
निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली में झोल!
मुंबई में मतदाता सूचियों में गड़बड़ी का मुद्दा एक बार फिर उभरा है। चारकोप के बाद अब वर्सोवा विधानसभा क्षेत्र में भी मतदाता सूचियों में बड़ा झोल होने का आरोप मनसे ने लगाया है। मनसे के वर्सोवा विभागाध्यक्ष संदेश देसाई ने इस संबंध में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि मतदाता सूचियों में विसंगतियों को देखते हुए निर्वाचन आयोग द्वारा तत्काल कार्रवाई करना आवश्यक है। इससे साफ है कि निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली में काफी झोल है।
मनसे कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए अध्ययन में सूची क्रमांक २६८ में एक ही घर के पते पर हिंदू, मुस्लिम और अन्य धर्मों के मतदाताओं के नाम दर्ज पाए गए हैं। इसके साथ ही साढ़े तीन सौ से अधिक मतदाताओं के पते ही उपलब्ध नहीं हैं। विशेष बात यह है कि महाराष्ट्र की मतदाता सूचियों में नाम मराठी भाषा में होने की अपेक्षा के बावजूद कुछ नाम बंगाली भाषा में पाए गए हैं। मनसे ने इससे पहले भी मुंबई के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता सूचियों की गलतियां उजागर कर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया था। अब वर्सोवा में इस नए मामले ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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